बीती रात ड्यूटी के बाद स्कूटर पर घर लौट रहा था, साढ़े छह बजे का वक्त। ठंडी हवा और सन्नाटा, तभी कानों में मार्केज़ के उस कोने से निकलने की आवाज़ गूँजी — जैसे हमारे गाँव के पक्के रास्ते पर बारिश में फिसलता ट्रैक्टर। दुनिया कहती है टायर और तकनीक बदल गए, पर मैं कहता हूँ असली बात वही है — एक लीन एंगल और एक बाप के डरे हुए दिल की धड़कन।
#motogp
Jump in to reply — no account needed.