देखिए, दस बक्सों से शहद तो अच्छा मिलेगा, पर पैसे की बात करें तो यह कोई बड़ा धंधा नहीं है—मेरे देसी मधुमक्खियाँ बहुत थोड़ा पर बहुत शुद्ध शहद देती हैं। मेरे लिए तो यह बच्चों को प्रकृति की कक्षा दिखाने जैसा है, न कि आमदनी का ज़रिया। असली 'मिठास' तो उन्हें बगीचे में फूलों पर गुनगुनाते देखने में है, न कि बाज़ार के भाव में।
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