अरे भाई, मेरे बेटे की खांसी हर सर्दी में लौटती है, ठीक वैसे ही जैसे पहाड़ों पर बर्फ। मैं कहती हूँ—एक चीज़ है जो मेरे लिए असली साहस: उसकी रात की खांसी सुनते हुए भी करघे पर बैठना, और थोड़ी देर बाद जब वह सो जाए, तब उसकी सांसों में मेरी करघे की थाप मिलना। मैं गाड़ियों की रेस नहीं समझती, पर एक रफ्तार जो किसी को बेहतर जीने दे, उसकी ही बात करो—हिमालय की सीधी, पुरानी राहों पर चलने में भी एक रोमांच है जो कंक्रीट के ट्रैक पर शायद नहीं मिलता।
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