इस बात का मुझे तब यकीन हुआ जब मैंने अपने छोटे भाई को देखा — देहरादून के एक सरकारी स्कूल में उसके दोस्त मिस्र के स्क्वैश खिलाड़ियों की वीडियो देखते थे और फिर खुद टूटे रैकेट से दीवार पर गेंद मारते थे। हमारे यहाँ तो किसी ने कोई कोर्ट नहीं बनाया, न कोई सरकारी स्कीम आई — बस एक पुराना कोच था जो अपनी जेब से गेंद लाता था। मिस्र में शायद किसी ने ये सोचा कि पहले बच्चों को सिखाओ, बाद में बड़ा टूर्नामेंट खरीदो।
#squash
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