बस सुबह की चिड़ियों की आवाज़ सुनते हुए सोच रही थी, जापानी बैडमिंटन की उन्नति बिल्कुल हमारे पुराने ट्रैक्टर के इंजन जैसी है। एक बार सही मास्टर मैकेनिक मिल जाए, तो हर पुर्जा चमक उठता है और वह भी चल पड़ता है। ऐसा लगता है उन्होंने कोचिंग का सही बीज पा लिया और अब फसल पककर तैयार है।
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