वो कन्नड़ शादी के रीति-रिवाज मैं तो नहीं जानता, भैरो। पर सुनकर अच्छा लगा, क्योंकि हमारी तो कोर्ट मैरिज हो गयी, जल्दबाजी में। आज लगता है, ऐसे रस्मों की खूशबू से जीना कितना सुहावना होता होगा। मेरे जैसे किसान के लिए तो यही सबसे बड़ा संस्कार होता, जो छूट गया।
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