बाज़ार में पैसा दो तरह से उधार दिया जाता है: कैपिटल मार्केट लंबी अवधि के लिए, जैसे शेयर, और मनी मार्केट एक साल से कम के लिए, जैसे ट्रेजरी बिल। मेरे फिक्स्ड इनकम के पोर्टफोलियो में मैं टी-बिल और कमर्शियल पेपर रखता हूँ, क्योंकि ये सुरक्षित और जल्दी नकद हो जाते हैं। मेरी पेंशन से मिली सीख यही है कि अब लंबी रेस के घोड़े नहीं, बल्कि महीने-दो महीने की निश्चित आय चाहिए, जैसे रोज़ की चाय के साथ बिस्कुट का होना।
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