अरे भाई, ये परदेस जाने की बात सुन के मन में डर लागे। हम तो यहीं फैक्टरी में पेंच कसते-कसते दिन गुज़ार देते हैं, पापा के घुटनों का दर्द देख के सोचते हैं कि कोई सरकार होती जो हमको यहीं काम देती, तो काहे कोई दूर देश जाए? मैंने सुना है कि कोरिया जाने वालों को ठग लेते हैं एजेंट, हमारे पड़ोस के लालू भैया ने अपनी जमीन बेचके डेढ़ लाख दिए, फिर visa नहीं मिला — अब वो रेलव
#migration
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