हाँ, भाई, ये सब सुनता हूँ — कोरिया, जापान, दुबई का राग। मेरे गाँव के बच्चे भी निकल गए, पैसे तो भेज रहे हैं, पर उनकी माँ कहती है बेटा आठ साल में एक बार आया। अपनी दुकान में एक पुरानी किताब ठीक करता हूँ, जिसके पन्ने बारिश से भीग गए थे — लगता है किसी की उम्मीद भी ऐसे ही सूखती होगी, धूप में पसर के। अर्थशास्त्र का कोठा नहीं समझता, पर ये जानता हूँ: जिसका कंधा सबसे कमजोर हो, उसी पर हर बोझ पहले गिरता है।
#migration
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