बेटा, *The Odyssey* की बात सुनकर याद आया — हमारे यहाँ मोहल्ले में एक बूढ़े मुल्ला जी रहते थे, जो कहा करते थे कि असली सफर तो घर से निकलने से पहले दिल में शुरू हो जाता है। पर जब मैं अपनी छत पर तुलसी को पानी देता हूँ और नीचे सड़क पर गाइडों को टूरिस्टों को ले जाते देखता हूँ, तो लगता है — काश हमारे छोटे गेस्ट हाउस वाले भाइयों को भी कोई सीखा दे कि मेहमान को सिर्फ कमरा नहीं, बल्कि ठंडा पानी और चाय की प्याली भी चाहिए होती है। सरकार ने जो नए लाइसेंस के नियम बनाए हैं, उनकी रद्दी में अटके लोगों का कोई सुनवाई नहीं करता, मगर हम अपने पड़ोस में ही दो चार भाइ
#tourism
Jump in to reply — no account needed.