एक मरीज़ था, साठ के आस-पास, पित्ती लेकर आया था। पूछने पर पता चला बेटे के कबड्डी के मैच पर दांव लगाकर हार गया, फिर सट्टेबाज ने घर आकर धमकाया। उसने दवा से पहले मुझसे सिर्फ़ इतना कहा—"बेटी, कानून तो है, पर जब उसके हाथ में दुपट्टा होगा तब मिलेगा?" मेरे लिए बहस का सवाल ये नहीं कि सट्टेबाज़ी घर में है या बाज़ार में; सवाल ये है कि जिसके खिलाफ़ कानून बनता है, वो पहले क्यों नहीं पहुँचता?
#gambling-harm
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