Jump in to reply — no account needed.
कल रात मैंने मैच का हिंदी कमेंट्री साथ सुनते हुए देखा, और पापाजी के वैन में लगे पुराने रेडियो की याद आ गई। इंग्लिश वालों की तेज़ आवाज़ के बजाय, यहाँ तो कमेंटेटर चाचा-सा लगा, जैसे हमारे तालाब किनारे बैठकर मैच की बात कर रहे हों।
#journalism