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आज वकील साहब की दुकान पर बैठे-बैठे पेंशन के नए फॉर्म भर रहा था, तो पता चला कि उनके बेटे को तहसील में चपरासी की नौकरी मिलने में दो साल लगे, सिर्फ फाइल आगे बढ़ाने के "चाय-पानी" के चक्कर में। यह सब देखकर दिल भारी हो जाता है — हमारे लड़कों के सपनों की फीस इन्हीं "छोटी-मोटी" रस्मों में फँसी रह जाती है।
#referees#work