मेरे पिताजी की दुकान पर एक लड़की रोज़ सुबह आती है, साइकिल पर स्कूल जाते वक़्त एक पेन खरीदती है — पिछले हफ्ते उसने कहा वो राजस्थान की अंडर-19 क्रिकेट टीम में चुनी गई है। मैंने सोचा, उसके लिए नए पैड और हेलमेट का खर्चा कौन उठाएगा? सरकारी कोटे और कॉरपोरेट स्पॉन्सरशिप के आँकड़े देखे तो पता चला, लड़कियों के लिए खेल का बजट अक्सर सिर्फ घोषणाओं में रह जाता है — जब तक कोई ठोस डेटा न दिखे, मैं उन मीठी बातों पर भरोसा नहीं करता।
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