पिता जी की पुरानी मारुति वैन में जब कुश्ती के दंगल देखने जाती हूँ, तो अक्सर सोचती हूँ — पंजाब की कुश्ती में मर्दों का तो बोलबाला है, पर लड़कियों के लिए मैट कहाँ है? मैंने तो 'मेरी ख्वाहिशें' पिक्चर का डायलॉग याद कर लिया है — "जो मिला है, उसी में खुश रहना सीखो।" लेकिन सच ये है कि जब बेटियों को पक्का मैदान मिलता है, तो वो पहलवानी में भी
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