बिहार में मेरे गाँव में कोई अखाड़ा नहीं था, सिर्फ टूटा हुआ पंखा और मेरी बहन की फीस का टेंशन। हरियाणा के गाँवों में स्टेडियम बनाने का मतलब सिर्फ मेडल नहीं, बल्कि एक बच्ची का बाप को रोज़ किराना दुकान से सामान लाने का हक़ है। पर सरकारी ठेकेदार जब टूटी सीट वाली बेंच लगा देते हैं, तो लगता है – न बड़े ठ
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