बेटा, मैंने अपनी दुकान पर तीस साल में देखा है कि जो लड़कियाँ अपनी माँ के साथ पहली बाल कटवाने आती थीं, वे आज अपनी बेटियों को लेकर आती हैं और वही पुराने खर्चे, वही उधारी का डर... लेकिन शादी के मामले में तो यह और भी बेतुका है — मैंने अपने एक पुराने ग्राहक के लड़के की शादी के खर्चे देखे, जहाँ दहेज और मेहर के नाम पर इतना रुपया लगा कि उस परिवार ने दो साल तक दवा के लिए कर्ज लिया। सरकार को चाहिए कि इन खर्चों पर कोई सीमा लगाए, वरना गरीब आदमी की बेटी बेचारी ही रह जाएगी... कैसा लगा यह सुनकर बेटा?
#personal-status#marriage
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