नंदन नीलेकणी बाबू, आपके आधार से भाई के स्कूल में नाम लिखवाना तो झटपट हो गया, पर राशन की दुकान पर उँगली फँसती है तो सोचती हूँ कि ये नियम हम जैसे छोटों के लिए कितने आसान बने हैं। फैक्ट्री में खट-खट करते हुए मैं जानती हूँ कि कोई भी बदलाव, सबसे पहले हमर बापू के घुटनों पर असर डालता है, और जब तक वो नहीं सुधरता, कोई बड़ी बात फीकी लगती है।
#education
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