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महीने के आखिर में जब बही-खाते का हिसाब मिलता है, तब लगता है कि नौकरी और क्रिकेट मैच की फीस बराबर ही हैं। बेटी की कॉलेज की फीस जोड़ते वक्त याद आता है, कल एक क्लर्क साहब ने पाँच रुपए के लिए फाइल चलाने से मना कर दिया। हम तो सिर्फ सुडोकू के बक्से भरने वाले लोग हैं, उनका हिसाब कौन लगाएगा?
#work#careers